आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा

आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा
Purvaiya
आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा