बजट 2026: निर्मला सीतारमण का ‘मिक्स वेज’ बजट—कहीं राहत की मलाई, तो कहीं टैक्स की कढ़ाई!

कैंसर से लड़ाई अब होगी सस्ती बजट की सबसे बड़ी और मानवीय खबर स्वास्थ्य के मोर्चे से आई है। वित्त मंत्री ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 लाइफ-सेविंग दवाओं पर से बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा दी है। इसका सीधा मतलब ये है कि अब ये महंगी दवाएं भारतीय बाज़ार में सस्ती मिलेंगी। इसके साथ ही, 7 ऐसी दुर्लभ बीमारियां जिनके इलाज के लिए दवाएं विदेश से मंगानी पड़ती थीं, उन पर भी टैक्स का बोझ खत्म कर दिया गया है। सरकार ने साफ़ संदेश दिया है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों की जेब पर अब कम भार पड़ेगा।

शेयर बाज़ार के ‘खिलाड़ियों’ को लगा जोर का झटका अगर आप लैपटॉप खोलकर दिन भर ‘बाय और सेल’ (F&O) के खेल में लगे रहते हैं, तो ये खबर आपके लिए थोड़ी कड़वी है। सरकार ने सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर लगने वाले टैक्स (STT) को बढ़ा दिया है। फ्यूचर्स पर अब 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% टैक्स लगेगा। यही नहीं, कंपनियों के ‘शेयर बायबैक’ के नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है। साफ़ है कि सरकार चाहती है कि लोग बाज़ार में जुआ न खेलें, बल्कि लंबी अवधि के लिए निवेश करें।

ग्रीन एनर्जी और EV का ‘पावर प्ले’ भविष्य की हवा साफ़ रखने के लिए सरकार ने ग्रीन एनर्जी पर दांव खेला है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान और सोलर पैनल बनाने वाले कच्चे माल (जैसे सोडियम एंटीमोनेट) पर ड्यूटी घटा दी गई है। परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए आने वाले उपकरणों को तो 2035 तक टैक्स फ्री कर दिया गया है। अब गेंद कंपनियों के पाले में है—अगर वो अपनी लागत कम होने का फ़ायदा ग्राहकों को देती हैं, तो आने वाले दिनों में सोलर लाइट और इलेक्ट्रिक स्कूटर सस्ते हो सकते हैं।

विदेश घूमना और पढ़ना हुआ आसान मिडिल क्लास जो विदेश में छुट्टियां मनाने या बच्चों को पढ़ाने का सपना देखता है, उसके लिए निर्मला जी ने ‘गुड न्यूज़’ दी है। विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स (TCS) को घटाकर सीधा 2% कर दिया गया है। चाहे पैकेज छोटा हो या बड़ा, अब लिमिट का झंझट खत्म। साथ ही, विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए 10 लाख से ज़्यादा भेजने पर भी अब सिर्फ 2% टैक्स लगेगा। अब आप बिना टैक्स की चिंता किए ‘पेरिस’ का टिकट कटा सकते हैं या बच्चे की यूनिवर्सिटी फीस भर सकते हैं।

एक्सपोर्ट को पंख और गैजेट्स को राहत ‘मेक इन इंडिया’ को रफ़्तार देने के लिए जूता, कपड़ा और सी-फूड सेक्टर को भी राहत दी गई है। इन सामानों को बनाने के लिए जो कच्चा माल विदेश से आता है, उस पर टैक्स की छूट बढ़ा दी गई है, ताकि हमारा सामान दुनिया भर में सस्ता और कॉम्पिटिटिव रहे। घर के इस्तेमाल के लिए माइक्रोवेव ओवन के कुछ पुर्जे सस्ते किए गए हैं। साथ ही, अगर आप विदेश से कोई गैजेट या गिफ्ट मंगाते हैं, तो उस पर लगने वाली 20% की ड्यूटी को घटाकर 10% कर दिया गया है।

विकसित भारत का लक्ष्य और कुछ कड़वी दवाएं अंत में बात ये कि सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ का सपना तो दिखाया है, लेकिन इनकम टैक्स देने वालों के लिए कोई बड़ी रियायत नहीं दी। वहीं शराब, स्क्रैप और कुछ खास रसायनों (Chemicals) पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। यानी सरकार ने इस बार उत्पादन बढ़ाने और गंभीर बीमारियों का बोझ कम करने पर तो ध्यान दिया है, लेकिन वित्तीय लेन-देन और लक्ज़री आइटम्स को थोड़ा महंगा कर दिया है। ये बजट एक संतुलित कोशिश है जहाँ एक तरफ राहत है, तो दूसरी तरफ ‘सावधानी’ भी।

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