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Ishq Me Aajmawal Gail Ba | Gautam Chauhan

Gautam Chauhan Entertainment
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आसमान से हल्का बुंदाबुंदी, चौपाई बयार के संगे पुस के महीना अंतिम चरण में रहे! लगभग दस दिन से सुरुज महाराज कबहूँ कुहासा त कबहूँ बदरी से तोपाइल,धरती पर आपन नजर ना फेरले रहले! हाड़ कंपावे वाला ठंड़ी के असर नवका लोग के भी जेकर खून अभीन गरम बा, रजाई में लुकाये के मजबूर कर देला तऽ सोचीं जे पुरान हो गइल बा ओकर का हाल होई?

नटवर के माई घर के ओसारा में एगो कोना पलास्टिक के चटाई पर बिछावल दोहरा बिछावन पर बइठ के थर थर कांपत रहली! ओढ़े के तऽ उ विदेश से आइल अरबियन कामरा ओढ़ले रहली, बाकिर पुरनिया देह खातिर उहो कामरा साइत कम पड़त रहे! उ मने मन इहे सोंचते रहली कि पलानी, से खपरैल ले, फेरु जब खपरैल से छत वाला मकान भइल तबहुं जिनगी में अइसन ठंढी कबहूँ ना आइल रहे! का जाने इ हमरा उमिर के दोस बा कि सांचो एतना हाड़ कंपावे वाला ठंढी आइल बा!

91 पाठक • 2 सप्ताह पहिले
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