बुढ़ापा एक दिन अइबे करी राम सागर सिंह 100 पाठक • 1 सप्ताह पहिले राम सागर सिंह • 100 पाठक • 1 सप्ताह पहिले
हमहुं एगो रोबोट बनवले रहनी राम सागर सिंह 63 पाठक • 1 सप्ताह पहिले राम सागर सिंह • 63 पाठक • 1 सप्ताह पहिले
माई राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 46 पाठक • 1 सप्ताह पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 46 पाठक • 1 सप्ताह पहिले
आपन लोग हरावत बाटे मुकेश यादव "भावुक" 106 पाठक • 2 सप्ताह पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 106 पाठक • 2 सप्ताह पहिले
बानी बड़ा मजबुरी मे,का लिखीं भोजपुरी मे शम्स जमील 126 पाठक • 2 सप्ताह पहिले शम्स जमील • 126 पाठक • 2 सप्ताह पहिले
थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में नेहा यादव 98 पाठक • 1 महीना पहिले नेहा यादव • 98 पाठक • 1 महीना पहिले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा नूरैन अंसारी 293 पाठक • 1 महीना पहिले नूरैन अंसारी • 293 पाठक • 1 महीना पहिले
अपने लोग अब पराया हो गइल मुकेश यादव "भावुक" 473 पाठक • 1 महीना पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 473 पाठक • 1 महीना पहिले
करिया कुकुर (भोजपुरी व्यंगात्मक लघु कहानी) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 121 पाठक • 1 महीना पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 121 पाठक • 1 महीना पहिले
पेयार अधूरा रह गइल (भोजपुरी विरह गीत ) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 115 पाठक • 1 महीना पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 115 पाठक • 1 महीना पहिले
हमार शान ह, हमार पहचान ह भोजपुरी हरेश्वर राय 120 पाठक • 1 महीना पहिले हरेश्वर राय • 120 पाठक • 1 महीना पहिले
फेरु बयरिया डोले लागी श्रद्धानंद पाण्डेय 76 पाठक • 1 महीना पहिले श्रद्धानंद पाण्डेय • 76 पाठक • 1 महीना पहिले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो,जिनिगिया बेकार मोर कइले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 83 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 83 पाठक • 1 महीना पहिले
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' 126 पाठक • 1 महीना पहिले संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' • 126 पाठक • 1 महीना पहिले
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 215 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 215 पाठक • 1 महीना पहिले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता नूरैन अंसारी 198 पाठक • 1 महीना पहिले नूरैन अंसारी • 198 पाठक • 1 महीना पहिले
याद त अइबे करी घरी-घरी राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 253 पाठक • 1 महीना पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 253 पाठक • 1 महीना पहिले
त थम गइल कविता के कारवां: आज होखे वाला ‘माटी मुक्तक महोत्सव’ रद्द द पुरवइया डेस्क 219 पाठक • 1 महीना पहिले द पुरवइया डेस्क • 219 पाठक • 1 महीना पहिले
माथे पर गमछा सजावल गइल बा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 60 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 60 पाठक • 1 महीना पहिले
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 46 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 46 पाठक • 1 महीना पहिले
राम जी के भइले जनमवा हो रामा, दशरथ के भवनवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 40 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 40 पाठक • 1 महीना पहिले
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा अइलें सजनवाँ गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 44 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 44 पाठक • 1 महीना पहिले
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 42 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 42 पाठक • 1 महीना पहिले
हहरा के बहेला चइत में बयरिया गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 40 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 40 पाठक • 1 महीना पहिले
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा, एजवा मारिये दिहलs गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 134 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 134 पाठक • 1 महीना पहिले
केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के शम्स जमील 281 पाठक • 1 महीना पहिले शम्स जमील • 281 पाठक • 1 महीना पहिले
रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया राम बहादुर राय 147 पाठक • 1 महीना पहिले राम बहादुर राय • 147 पाठक • 1 महीना पहिले
रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा मनोज भावुक 77 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 77 पाठक • 2 महीना पहिले
कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के मनोज भावुक 35 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 35 पाठक • 2 महीना पहिले
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में मनोज भावुक 170 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 170 पाठक • 2 महीना पहिले
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे मनोज भावुक 38 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 38 पाठक • 2 महीना पहिले
बात पर बात होता बात ओराते नइखे मनोज भावुक 38 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 38 पाठक • 2 महीना पहिले
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात मनोज भावुक 42 पाठक • 2 महीना पहिले मनोज भावुक • 42 पाठक • 2 महीना पहिले