बुढ़ापा एक दिन अइबे करी राम सागर सिंह 31 पाठक • 14 घंटे पहिले राम सागर सिंह • 31 पाठक • 14 घंटे पहिले
हमहुं एगो रोबोट बनवले रहनी राम सागर सिंह 45 पाठक • 14 घंटे पहिले राम सागर सिंह • 45 पाठक • 14 घंटे पहिले
आपन लोग हरावत बाटे मुकेश यादव "भावुक" 84 पाठक • 3 दिन पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 84 पाठक • 3 दिन पहिले
बानी बड़ा मजबुरी मे,का लिखीं भोजपुरी मे शम्स जमील 108 पाठक • 4 दिन पहिले शम्स जमील • 108 पाठक • 4 दिन पहिले
थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में नेहा यादव 90 पाठक • 3 सप्ताह पहिले नेहा यादव • 90 पाठक • 3 सप्ताह पहिले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा नूरैन अंसारी 277 पाठक • 3 सप्ताह पहिले नूरैन अंसारी • 277 पाठक • 3 सप्ताह पहिले
अपने लोग अब पराया हो गइल मुकेश यादव "भावुक" 462 पाठक • 3 सप्ताह पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 462 पाठक • 3 सप्ताह पहिले
करिया कुकुर (भोजपुरी व्यंगात्मक लघु कहानी) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 110 पाठक • 3 सप्ताह पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 110 पाठक • 3 सप्ताह पहिले
पेयार अधूरा रह गइल (भोजपुरी विरह गीत ) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 112 पाठक • 3 सप्ताह पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 112 पाठक • 3 सप्ताह पहिले
हमार शान ह, हमार पहचान ह भोजपुरी हरेश्वर राय 115 पाठक • 1 महीना पहिले हरेश्वर राय • 115 पाठक • 1 महीना पहिले
फेरु बयरिया डोले लागी श्रद्धानंद पाण्डेय 71 पाठक • 1 महीना पहिले श्रद्धानंद पाण्डेय • 71 पाठक • 1 महीना पहिले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो,जिनिगिया बेकार मोर कइले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 78 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 78 पाठक • 1 महीना पहिले
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' 124 पाठक • 1 महीना पहिले संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' • 124 पाठक • 1 महीना पहिले
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 208 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 208 पाठक • 1 महीना पहिले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता नूरैन अंसारी 193 पाठक • 1 महीना पहिले नूरैन अंसारी • 193 पाठक • 1 महीना पहिले
याद त अइबे करी घरी-घरी राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 248 पाठक • 1 महीना पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 248 पाठक • 1 महीना पहिले
त थम गइल कविता के कारवां: आज होखे वाला ‘माटी मुक्तक महोत्सव’ रद्द द पुरवइया डेस्क 209 पाठक • 1 महीना पहिले द पुरवइया डेस्क • 209 पाठक • 1 महीना पहिले
माथे पर गमछा सजावल गइल बा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 57 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 57 पाठक • 1 महीना पहिले
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 42 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 42 पाठक • 1 महीना पहिले
राम जी के भइले जनमवा हो रामा, दशरथ के भवनवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 38 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 38 पाठक • 1 महीना पहिले
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा अइलें सजनवाँ गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 43 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 43 पाठक • 1 महीना पहिले
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 39 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 39 पाठक • 1 महीना पहिले
हहरा के बहेला चइत में बयरिया गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 38 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 38 पाठक • 1 महीना पहिले
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा, एजवा मारिये दिहलs गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 130 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 130 पाठक • 1 महीना पहिले
केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के शम्स जमील 274 पाठक • 1 महीना पहिले शम्स जमील • 274 पाठक • 1 महीना पहिले
रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया राम बहादुर राय 125 पाठक • 1 महीना पहिले राम बहादुर राय • 125 पाठक • 1 महीना पहिले
रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा मनोज भावुक 73 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 73 पाठक • 1 महीना पहिले
कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के मनोज भावुक 32 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 32 पाठक • 1 महीना पहिले
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में मनोज भावुक 157 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 157 पाठक • 1 महीना पहिले
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे मनोज भावुक 33 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 33 पाठक • 1 महीना पहिले
बात पर बात होता बात ओराते नइखे मनोज भावुक 33 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 33 पाठक • 1 महीना पहिले
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात मनोज भावुक 35 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 35 पाठक • 1 महीना पहिले
अबकी दियरी के परब अइसे मनावल जाए मनोज भावुक 31 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 31 पाठक • 1 महीना पहिले