रूह से पर्दा हटाओ तो ज़रा तुम अंकुश तिवारी 22 पाठक • 6 घंटे पहिले अंकुश तिवारी • 22 पाठक • 6 घंटे पहिले
आपन लोग हरावत बाटे मुकेश यादव "भावुक" 100 पाठक • 1 सप्ताह पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 100 पाठक • 1 सप्ताह पहिले
बानी बड़ा मजबुरी मे,का लिखीं भोजपुरी मे शम्स जमील 123 पाठक • 1 सप्ताह पहिले शम्स जमील • 123 पाठक • 1 सप्ताह पहिले
थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में नेहा यादव 93 पाठक • 4 सप्ताह पहिले नेहा यादव • 93 पाठक • 4 सप्ताह पहिले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा नूरैन अंसारी 288 पाठक • 4 सप्ताह पहिले नूरैन अंसारी • 288 पाठक • 4 सप्ताह पहिले
अपने लोग अब पराया हो गइल मुकेश यादव "भावुक" 469 पाठक • 4 सप्ताह पहिले मुकेश यादव "भावुक" • 469 पाठक • 4 सप्ताह पहिले
करिया कुकुर (भोजपुरी व्यंगात्मक लघु कहानी) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 117 पाठक • 4 सप्ताह पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 117 पाठक • 4 सप्ताह पहिले
पेयार अधूरा रह गइल (भोजपुरी विरह गीत ) राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 114 पाठक • 4 सप्ताह पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 114 पाठक • 4 सप्ताह पहिले
हमार शान ह, हमार पहचान ह भोजपुरी हरेश्वर राय 116 पाठक • 1 महीना पहिले हरेश्वर राय • 116 पाठक • 1 महीना पहिले
फेरु बयरिया डोले लागी श्रद्धानंद पाण्डेय 73 पाठक • 1 महीना पहिले श्रद्धानंद पाण्डेय • 73 पाठक • 1 महीना पहिले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो,जिनिगिया बेकार मोर कइले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 82 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 82 पाठक • 1 महीना पहिले
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' 125 पाठक • 1 महीना पहिले संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य' • 125 पाठक • 1 महीना पहिले
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 214 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 214 पाठक • 1 महीना पहिले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता नूरैन अंसारी 195 पाठक • 1 महीना पहिले नूरैन अंसारी • 195 पाठक • 1 महीना पहिले
याद त अइबे करी घरी-घरी राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 251 पाठक • 1 महीना पहिले राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' • 251 पाठक • 1 महीना पहिले
त थम गइल कविता के कारवां: आज होखे वाला ‘माटी मुक्तक महोत्सव’ रद्द द पुरवइया डेस्क 216 पाठक • 1 महीना पहिले द पुरवइया डेस्क • 216 पाठक • 1 महीना पहिले
माथे पर गमछा सजावल गइल बा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 58 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 58 पाठक • 1 महीना पहिले
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 45 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 45 पाठक • 1 महीना पहिले
राम जी के भइले जनमवा हो रामा, दशरथ के भवनवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 40 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 40 पाठक • 1 महीना पहिले
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा अइलें सजनवाँ गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 44 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 44 पाठक • 1 महीना पहिले
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 42 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 42 पाठक • 1 महीना पहिले
हहरा के बहेला चइत में बयरिया गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 39 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 39 पाठक • 1 महीना पहिले
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा, एजवा मारिये दिहलs गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 131 पाठक • 1 महीना पहिले गणेश नाथ तिवारी "विनायक" • 131 पाठक • 1 महीना पहिले
केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के शम्स जमील 280 पाठक • 1 महीना पहिले शम्स जमील • 280 पाठक • 1 महीना पहिले
रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया राम बहादुर राय 140 पाठक • 1 महीना पहिले राम बहादुर राय • 140 पाठक • 1 महीना पहिले
रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा मनोज भावुक 75 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 75 पाठक • 1 महीना पहिले
कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के मनोज भावुक 34 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 34 पाठक • 1 महीना पहिले
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में मनोज भावुक 167 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 167 पाठक • 1 महीना पहिले
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे मनोज भावुक 35 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 35 पाठक • 1 महीना पहिले
बात पर बात होता बात ओराते नइखे मनोज भावुक 35 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 35 पाठक • 1 महीना पहिले
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात मनोज भावुक 40 पाठक • 1 महीना पहिले मनोज भावुक • 40 पाठक • 1 महीना पहिले