पुरवइया
अतिथि
लॉगिन करें
सेव्ड
लेखक
वीडियोज़
एक्सप्लोर करें
कवि सम्मेलन
टॉपिक्स
हमारे बारे में
सेटिंग्स
फ़ीडबैक
पुरवइया
होम
बड़ी ख़बर
राजनीति
भोजपुरी साहित्य
भोजपुरी सनीमा
भोजपुरी साहित्य
सभी
कविता
भोजपुरी गीत
मुक्तक
ग़ज़ल
गीत जिनिगी के गावल ह आपन धरम-जयकांत सिंह ‘जय’
4 दिन पहले
छोट बात पर खास लोग से मुंह मोरल थोड़े जाला
4 दिन पहले
अब तऽ कुछ तू बोल रे मनवा
2 महीना पहले
रोपनी के रऊँदल देहिया, सँझही निनाला तनि जगइह पिया-प्रकाश उदय
2 महीना पहले
भाई-भाई में जब बँटवारा भइल
2 महीना पहले
अन्हरिया, काहें जिनिगिया में आइल
2 महीना पहले
गोरी के भीज जाला कजरा
2 महीना पहले
अब त दूरे से, राम-राम होता इहाँ
2 महीना पहले
काटेला जे भी दिन बनवास के
3 महीना पहले
परदेशी के ईद अइसने होला
3 महीना पहले
कईसे हम ईद मनवनी ह
3 महीना पहले
केहू यार बताई?
3 महीना पहले
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी
3 महीना पहले
आठवीं अनुसूची से
3 महीना पहले
हमहुं एगो रोबोट बनवले रहनी
3 महीना पहले
माई
3 महीना पहले
आपन लोग हरावत बाटे
3 महीना पहले
बानी बड़ा मजबुरी मे,का लिखीं भोजपुरी मे
3 महीना पहले
तुम मुझे याद भी करते हो क्या
4 महीना पहले
ना दूर रहेनी,ना पास रहेनी
4 महीना पहले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा
4 महीना पहले
अपने लोग अब पराया हो गइल
4 महीना पहले
सब एहीजे मिली
4 महीना पहले
पेयार अधूरा रह गइल (भोजपुरी विरह गीत )
4 महीना पहले
हमार शान ह, हमार पहचान ह भोजपुरी
4 महीना पहले
फेरु बयरिया डोले लागी
4 महीना पहले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो,जिनिगिया बेकार मोर कइले
4 महीना पहले
1
2
3
4
अगला »
होम
कवि सम्मेलन
वीडियो
शब्दकोश
अकाउंट