अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने पुराने ‘ग्रीनलैंड’ प्रेम को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार मामला सिर्फ ख़्वाहिश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘टैरिफ वॉर’ (Tariff War) तक पहुँच गया है। ट्रंप ने साफ़ कह दिया है कि अगर ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की उनकी इच्छा के बीच में कोई यूरोपीय देश आया, तो उसे भारी टैरिफ भुगतना पड़ेगा।
क्या है पूरा माजरा?
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि डेनमार्क का यह अर्द्ध-स्वायत्त क्षेत्र (ग्रीनलैंड) अमेरिकी सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से बेहद ज़रूरी है। उत्तरी अमेरिका और आर्कटिक के बीच इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि मिसाइल हमलों की शुरुआती चेतावनी और जहाज़ों की निगरानी के लिए यह सोने की खान जैसा है।
अब ट्रंप साहब ने धमकी दी है कि:
- फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स समेत फ़िनलैंड, डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे पर 1 फ़रवरी से 10% टैरिफ लगाया जाएगा।
- यही नहीं, अगर बात नहीं बनी तो इसे बढ़ाकर 25% तक किया जा सकता है।
फ़िनलैंड के पीएम पेटेरी ओर्पो ने क्या कहा?
ट्रंप की इस धमकी पर फ़िनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने ‘दो टूक’ जवाब दिया है। उन्होंने साफ़-साफ़ शब्दों में इसे ‘सेल्फ-गोल’ (Self-goal) करार दिया है। उनके मुख्य बिंदु कुछ इस तरह हैं:
- बातचीत बनाम दबाव: ओर्पो ने सोशल मीडिया पर कहा कि सहयोगियों के बीच किसी भी मसले को बातचीत से हल करना चाहिए, दबाव या धमकी से नहीं।
- दोनों का नुकसान: उन्होंने चेतावनी दी कि इन टैरिफ से सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका को भी भारी आर्थिक नुकसान होगा। यह किसी के लिए भी अच्छी स्थिति नहीं है।
- आर्कटिक की सुरक्षा: फ़िनलैंड ने माना कि आर्कटिक की सुरक्षा अहम है, लेकिन इसका समाधान डेनमार्क और ग्रीनलैंड की क्षेत्रीय अखंडता (Regional Integrity) का सम्मान करते हुए ही निकाला जाना चाहिए।
बड़ी बात क्या है?
लब्बोलुआब यह है कि ट्रंप प्रशासन इस द्वीप को अपनी नेशनल सिक्योरिटी का हिस्सा मान रहा है, जबकि यूरोपीय देश इसे अपनी संप्रभुता पर हमला और व्यापारिक ब्लैकमेलिंग की तरह देख रहे हैं।
चलते-चलते: अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप की यह ‘बिज़नेसमैन’ वाली रणनीति काम आती है या फिर अमेरिका और यूरोप के पुराने रिश्तों में यह ग्रीनलैंड वाला ‘बर्फ़’ और ज़्यादा ठंडक पैदा कर देता है।



