अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थाई शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कार्ड खेला है। ट्रंप ने भारत को ‘गाजा शांति बोर्ड’ (Gaza Board of Peace) का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
शांति की राह में भारत की बढ़ती साख माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता और संतुलित कूटनीति को देखते हुए अमेरिका ने यह फैसला लिया है। भारत के संबंध इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों पक्षों से बेहतर रहे हैं, जो उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाता है। यह आमंत्रण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती अहमियत का एक और बड़ा सबूत है।

क्या है गाजा शांति बोर्ड? बता दें कि 13 अक्टूबर 2025 को ट्रंप की मध्यस्थता में इजरायल और हमास के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ था। मिस्र के ‘शर्म एल-शेख’ में हुए शिखर सम्मेलन में ‘गाजा घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा की निगरानी के लिए एक ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का प्रस्ताव रखा गया था, जिसकी अगुवाई फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर कर रहे हैं। अब भारत के इस बोर्ड में शामिल होने से मध्य पूर्व में शांति के प्रयासों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रिश्तों में नई गर्माहट पिछले साल सितंबर में पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा किन्हीं कारणों से टल गया था, लेकिन इस ताजा आमंत्रण ने दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघला दिया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम न केवल पश्चिम एशिया में शांति लाएगा, बल्कि भारत-अमेरिका के सामरिक रिश्तों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



