कहानी की शुरुआत क्रिकेट से नहीं, बल्कि सियासत और आईपीएल (IPL) से होती है. शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कड़वाहट घुली हुई है. इसी बीच IPL 2026 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेशी पेसर मुस्तफ़िज़ुर रहमान को 9 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम में खरीद लिया.
अब यहीं से शुरू हुआ विरोध. कुछ संगठनों ने शाहरुख खान की टीम के इस फैसले पर आपत्ति जताई. दबाव इतना बढ़ा कि 2 जनवरी को बीसीसीआई (BCCI) ने KKR से कह दिया कि मुस्तफ़िज़ुर को टीम से बाहर करो. बस, यही बात बांग्लादेश सरकार और वहां के क्रिकेट बोर्ड (BCB) को चुभ गई. उन्होंने इसे अपने देश का ‘अपमान’ बताया और ऐलान कर दिया कि उनकी टीम वर्ल्ड कप खेलने भारत नहीं जाएगी.
BCB की जिद और ICC का ‘नो-नॉनसेन्स’ जवाब
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ICC के सामने हाथ-पैर जोड़े कि सुरक्षा का हवाला देकर हमारे मैच भारत की जगह श्रीलंका शिफ्ट कर दो. बुधवार (21 जनवरी) को ICC ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पंचायत (बोर्ड मीटिंग) बिठाई और दो-टूक जवाब दे दिया:
- सुरक्षा का कोई खतरा नहीं: ICC ने कहा कि हमने जांच करवा ली है. बांग्लादेशी खिलाड़ियों, मीडिया या फैंस को भारत में कोई खतरा नहीं है.
- वक्त कम है, मुमकिन नहीं: टूर्नामेंट 7 फरवरी से शुरू हो रहा है. ऐन वक्त पर वेन्यू बदलना मुमकिन नहीं है.
- गलत मिसाल नहीं बनने देंगे: ICC का मानना है कि अगर बिना किसी ठोस सुरक्षा खतरे के सिर्फ राजनीतिक दबाव में मैच शिफ्ट किए गए, तो आगे चलकर हर देश यही नौटंकी करेगा.
- मुस्तफ़िज़ुर का मामला अलग है: ICC ने दो टूक कहा कि बांग्लादेश बार-बार वर्ल्ड कप को एक खिलाड़ी के आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट से जोड़ रहा है, जबकि इन दोनों बातों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है.
अब आगे क्या?
ICC ने अपनी तरफ से ‘इवेंट सिक्योरिटी प्लान’ की फाइल बांग्लादेश को थमा दी है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की सुरक्षा गारंटी शामिल है. नियम सभी 20 देशों के लिए बराबर हैं. अब गेंद बांग्लादेश के पाले में है.



