#Chetna Pandey

कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है-चेतना पाण्डेय

कवयित्री बताती हैं कि खुशियाँ और राहत सबको बराबर नहीं मिलतीं, और जब दिल बुझा हुआ हो तो सावन जैसी ऋतु भी भीतर बेचैनी पैदा कर देती है