पुरवइया खोज (Search)
पुरवइया Menu
पुरवइया परिवार लॉगिन / जुड़ें
भोजपुरी साहित्य
3

एगो हमरो आपन बिहार बसेला

ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

10.7K Views
31 अक्टूबर 2026 · 11:07 अपराह्न IST

राजपूत अहीर कायस्थ भूमिहार बसेला
तेली पासी धूनिया आ कुम्हार बसेला
ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

नालंदा जहाँ बा विक्रमशीला जहाँ बा
शेर शाह सूरी के किला जहाँ बा
जे हमरा भोजपुरी के अलख जगावल
भिखारी ठाकुर के जिला जहाँ बा

अस्सी साल के बाबू वीर कुंवर के
जगदीशपुर मे जहाँ दहाड़ बसेला
ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

खेत खलिहान पहचान बा जेकर
सरयू कोशी गंगा जान बा जेकर
मगही मैथली अंगिका वज्जिका
भोजपुरी जहाँ शान बा जेकर

आज भी जहाँ गाँव मे एगो
ठाट से संयुक्त परिवार बसेला
ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

हर जाति धरम से प्रीत बा एहिजा
इहे बड़हन प्रान्त के जीत बा एहिजा
रोपनी सोहनी से ओसाई पिसाई तक
हर काम काज के गीत बा एहिजा

आस्था अउरी भारा भखउती के जहाँ
छठ के महापरब आ तेवहार बसेला
ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

दुख बाटे जहाँ सुख बाटे जहाँ
परदेस के तरफ रुख बाटे जहाँ
पलायन के पीड़ा से उभरल कबो नाही
कुछ त सरकारन के चूक बाटे जहाँ

अंखिया मे जहाँ एगो धनी के सालोंभर
पति के अपना इंतजार बसेला
ओही भारत देश के भूमि पर जी
भइया एगो हमरो आपन बिहार बसेला

कठिन शब्द अउर अर्थ

होम कवि सम्मेलन वीडियो साहित्य अकाउंट