चाहे गमछा फार के रहअ

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।

ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से

जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।

झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ

जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

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