चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।
दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।
ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से
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राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे
असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में
छोट बात पर खास लोग से मुंह मोरल थोड़े जाला
जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।
झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ
जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।
चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।