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भोजपुरी साहित्य

चाहे गमछा फार के रहअ

जमील मिर
9 जनवरी 2026 · 04:20 अपराह्न IST

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।

ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से

जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।

झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ

जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

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