कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है
कहीं बेबस कोई मन खौलता है
फुहारें सबके हिस्से में कहां हैं
बुझा हो दिल तो सावन खौलता है
लगें जब कानाफूसी करने कमरे
तो फिर उकता के आँगन खौलता है
जो पागल ढूंढते रंगों में मज़हब
उन्हें देखे तो फागुन खौलता है
किसी को कैद,आजादी किसी को
सज़ा कैसी है, बन्धन खौलता है



