जइसे गरमी में दिवाकर के,
आ सस्ती में टमाटर के
जइसे बिना धार के फरसा के,
आ बिन मौसम के बरसा के
जइसे बिना भुख के भात के,
आ मेहंदी लागल हाथ के
जइसे ठंडा में पछुआ पुरुवा के,
आ बिना छत के घरवा के
जइसे बिन उपजाउ माटी के,
आ टुटल गोड़ वाली खाटी के
जइसे बिन सियाही कलम के,
आ बिना चोट के मरहम के
जइसे फाटल जूता के,
आ बिन गरु के खूटा के
जइसे सुख में सुमिरन के,
आ काटल छाटल कतरन के
जइसे बिन जरूरत अनाज के,
आ फायदा बिना समाज के
जइसे मदद बाद मददगार के,
आ समाज में बेरोजगार के
जइसे बिना चमक के चानी के,
आ बिना जोर के आन्ही के
जइसे बिन मौका राष्ट्रगान के,
आ असमय भारत सम्मान के
जइसे हमनी देश में जनानी के,
आ पढ़ल लिखल ज्ञानी के
सुनऽ ए रिशु,
उहे कीमत बा आज एक रूपिया के।



