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एक रूपिया के कीमत के कहानी

रिशु कुमार गुप्ता 3 जनवरी 2026, 05:11 अपराह्न (IST)
रिशु कुमार गुप्ता (कसियां, डुमरांव, बक्सर से)

जइसे गरमी में दिवाकर के,
आ सस्ती में टमाटर के

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गाँव के माटी, मन के मीत

जइसे बिना धार के फरसा के,
आ बिन मौसम के बरसा के

जइसे बिना भुख के भात के,
आ मेहंदी लागल हाथ के

जइसे ठंडा में पछुआ पुरुवा के,
आ बिना छत के घरवा के

जइसे बिन उपजाउ माटी के,
आ टुटल गोड़ वाली खाटी के

जइसे बिन सियाही कलम के,
आ बिना चोट के मरहम के

जइसे फाटल जूता के,
आ बिन गरु के खूटा के

जइसे सुख में सुमिरन के,
आ काटल छाटल कतरन के

जइसे बिन जरूरत अनाज के,
आ फायदा बिना समाज के

जइसे मदद बाद मददगार के,
आ समाज में बेरोजगार के

जइसे बिना चमक के चानी के,
आ बिना जोर के आन्ही के

जइसे बिन मौका राष्ट्रगान के,
आ असमय भारत सम्मान के

जइसे हमनी देश में जनानी के,
आ पढ़ल लिखल ज्ञानी के

सुनऽ ए रिशु,
उहे कीमत बा आज एक रूपिया के।

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