जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल-श्रद्धानन्द पाण्डेय

हमेशा रहल नेह दियना बुताइल,
जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल।


हिया में रहल पीर अँखियनि में पानी,
न जियरा के केहू सकल सुनि कहानी,
न ओठनि प आइल कबो बात मन में,
जिनिगिया ई सोचे-विचारे में बीतल।


न आइल कबो ले संदेशा बदरिया,
रहल ताकते नीर भरले नजरिया,
न आइल घरे मीत मनवाँ के कबहूँ,
जिनिगिया ई रहिया निहारे में बीतल।


गइल बीत सावन ना गवलीं कजरिया,
बहल ना कबो मन्द शीतल बयरिया,
न साधनि के हमरा कबो मेघ बरिसल
जिनिगिया ई अबले सुखारे में बीतल।

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