मत रुसीं कोहनाईं जी।
लीं कुछ मीठा खाईं जी।
बनि बात,बात कइला से,
मुहवां मत बिचकाईं जी।
आईं अब, त चलीं हमरा,
संगे बन के भाई जी।
गांव नगर सभे ह आपन ,
ठंढा पानी पांईं जी।
पढ़ल लिखल बानी रउआ,
बिगड़ल सब सझुराईं जी।
पथ छोड़ीं टेढ़ा-मेढ़ा,
बढियां राह बनाईं जी।
तजीं अब त हड़पल सब के ,
आपन करीं कमाईं जी।