पुरवइया खोज (Search)
पुरवइया Menu
पुरवइया परिवार लॉगिन / जुड़ें
कविता

सोचऽ कइसे तोहरा बिना, जीयत बानी हो

बहुते याद आवेला तोहरा रानी हो..
सोचा कइसे तोहरा बिना जियत बानी हो

कुँवर बृजेश , डुमरी,बक्सर
1.2K Views
1 नवम्बर 2026 · 07:53 अपराह्न IST

बहुते याद आवेला तोहरा रानी हो..
सोचा कइसे तोहरा बिना जियत बानी हो

आवा मिला होई बड़ा मेहरबानी हो
सोचा तोहरा बिना कइसे जियत बानी हो

सुनर आपन त बाटे बड़ा कहानी हो
सोचा तोहरा बिना कइसे जियत बानी हो..

तोहके देखे बिना हम मर जानी हो
सोचा जियत कइसे तोहरा बिना बानी हो

मिला एक बार आके मोरा रानी हो
होई-होई हम पे तोहार बड़ा मेहरबानी हो

तोहरा काजल पर त हम मर जानी हो
सोना कइसे अब हम जियत बानी हो

तोहके देखि-देखि हम मुसकानी जी
जान देखि-देखि हम मर जानी हो

आव मिला हम से एक बार रानी हो
देखा कइसे तोहरा बिना जियत बानी हो..

होम कवि सम्मेलन वीडियो साहित्य अकाउंट