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भोजपुरी साहित्य
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मत रुसीं कोहनाईं जी

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3 नवम्बर 2026 · 12:42 अपराह्न IST

मत रुसीं कोहनाईं जी।
लीं कुछ मीठा खाईं जी।

बनि बात,बात कइला से,
मुहवां मत बिचकाईं जी।

आईं अब, त चलीं हमरा,
संगे बन के भाई जी।

गांव नगर सभे ह आपन ,
ठंढा पानी पांईं जी।

पढ़ल लिखल बानी रउआ,
बिगड़ल सब सझुराईं जी।

पथ छोड़ीं टेढ़ा-मेढ़ा,
बढियां राह बनाईं जी।

तजीं अब त हड़पल सब के ,
आपन करीं कमाईं जी।

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