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कविता
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प्यासा के तुकबन्दी

का बा कहला में।
सब बा सहला में।

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1 नवम्बर 2026 · 11:47 पूर्वाह्न IST

का बा कहला में।
सब बा सहला में।

माजा बा सुन के,
चुपचाप रहला में।

बिगड़े ला बात सब,
बात के महला में।

केहू के जरला प,
फोरन के दहला में।

का बा कहला में,
सब बा सहला में।

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