चलत जबले जिनगी के गाड़ी रहे

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

चलत जबले जिनगी के गाड़ी रहे,
न पईसा न कवनो उधारी रहे।

​नेह-छोह अइसन बनल रहे हरदम,
कि उमिर भर कायम ई यारी रहे।

​जरूरत पड़े त ई जानो बा हाजिर,
कहे-सुने में कहुँ न दुशवारी रहे।

​बोवल जाई अबसे भरोसे के खेती,
न मन में कवनो दुख भारी रहे।

​हँसत-खेलत काटीं निमन सब समइया,
बाकिर बुरा वक्त के भी तइयारी रहे।

​कहाँ अब बा कवनो डर-भय ‘भावुक’,
जिनगी जंग ह, रोज जंग जारी रहे।

मुकेश भावुक

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