रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे,
जवन परल दरार भराईब कइसे।
हमहु चुप रहब आ रउवो चुप रहब,
तऽ चुपी के दीवार गिराईब कइसे।
बात छोटी-छोटी जे दिल से लगायब,
तऽ नाता इ आगे निभाईब कइसे।
खिसिया के कोहबर में बइठल रहब तऽ,
इ रिस्ता के आगे बढ़ाईब कइसे।
ना रउवा ही राजी ना हमही ही राजी,
तऽ माफी के हाथ बढ़ाईब कइसे।
डूबल बा इ दिल याद के समंदर में,
तऽ टूटत ई धीरज बँधाईब कइसे।
अहम रउवो में बा, अहम हमरो में बा,
तऽ ई “अहम” के मिल के हराईब कइसे।
जिंदगी तऽ केहू के मिलल ना सदा के,
तऽ तन्हा ई लम्हा बिताईब कइसे।
मूँद जाई आँखी जो दुनु में से केहू के,
तऽ ‘किरन’ फेर धैर्य बँधाईब कइसे।
