एक तरफ़ तो आँगन में दीवाली थी

@gaurav_sakshi • 109 Views • 8 अप्रैल, 2026

एक तरफ़ तो आँगन में दीवाली थी,
घर के अंदर झाँका तो बदहाली थी।

उसकी क्या पहचान बताऊँ मैं तुमको,
गर्दन पर तिल था कानो में बाली थी।

हम तो उसकी याद मिटाने बैठे थे,
ग्लास भरा था बोतल पूरी खाली थी।

कल कोई पी.के. आकर यह बोलेगा,
पहले इस गोले पर भी हरियाली थी।

पास हमारे आते ही सो जाती है,
वो जो पूरी रात जगाने वाली थी।

क्या बतलाएँ कैसा इश्क़ रहा अपना,
यह समझो की हमने आफ़त पाली थी।

अभी अभी वो हमको छोड़ गई हमने,
अभी अभी तो उसकी आदत डाली थी।

उसने भी इक गीत लिखा सो बदले में,
हमने भी दो चार ग़ज़ल कह डाली थी।

Purvaiya
गौरव साक्षी @gaurav_sakshi

एक तरफ़ तो आँगन में दीवाली थी,
घर के अंदर झाँका तो बदहाली थी।

उसकी क्या पहचान बताऊँ मैं तुमको,
गर्दन पर तिल था कानो में बाली थी।

हम तो उसकी याद मिटाने बैठे थे,
ग्लास भरा था बोतल पूरी खाली थी।

कल कोई पी.के. आकर यह बोलेगा,
पहले इस गोले पर भी हरियाली थी।

पास हमारे आते ही सो जाती है,
वो जो पूरी रात जगाने वाली थी।

क्या बतलाएँ कैसा इश्क़ रहा अपना,
यह समझो की हमने आफ़त पाली थी।

अभी अभी वो हमको छोड़ गई हमने,
अभी अभी तो उसकी आदत डाली थी।

उसने भी इक गीत लिखा सो बदले में,
हमने भी दो चार ग़ज़ल कह डाली थी।

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