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भोजपुरी साहित्य

गाँव के माटी, मन के मीत

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
10 अप्रैल 2026 · 02:56 अपराह्न IST

गाँव के माटी, मन के मीत,
गावत बा ई, सुंदर गीत।

​खेतन में बा, हरियर धान,
बढ़े हमरा, देस के मान।

​नदी किनारे, सीतल धार,
बहत बाटे, मन्द बयार।

​चिड़िया चहके, गूँजे गान,
भोर भइल अब,तजहुँ मसान।

​नीम के पेड़, अउर हरियाली,
झूले झूला, डाली-डाली।

​बरगद बाबा, छइयाँ देत,
मेहनत करहीं, सबहूँ खेत।

​पगडंडी के, धूर सुहानी,
याद आवे, पुरखा के बानी।

​गऊ चरावत, ग्वाला गीत,
साँच रहे ई, जग के रीत।

​शाम भइल जब, दीप जलावे,
घर-घर में तब, मंगल छावे।

​प्रेम भाव के, बहे बयार,
माटी से बा, गहरा प्यार।

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