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भाई-भाई में जब बँटवारा भइल

भाई-भाई में जब बँटवारा भइल,पाटीदारन के घरे भण्डारा भइल माई-बाबू के केहू झूठो ना पुछलएकही गो रोटी कई खाड़ा भइल. अमीरी में डाह के धइलस…
नूरैन अंसारी 20 जून 2026 (पब्लिश्ड: 12:07 IST)

भाई-भाई में जब बँटवारा भइल,
पाटीदारन के घरे भण्डारा भइल

माई-बाबू के केहू झूठो ना पुछल
एकही गो रोटी कई खाड़ा भइल.

अमीरी में डाह के धइलस बेमारी,
गरीबी में तऽ प्रेम से गुजारा भइल.

देखल ना गइल लोग से ई बढ़न्ती,
घर फुटल, स्वाहा भाईचारा भइल.

उठ गइल आख़िर देवाल अँगना में,
पर- पंचायत जबकि सारा भइल.

नूरैन हेरा गइल ख़ुशी घर से हमरा,
टुवर जइसन आँगन,ओसारा भइल

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