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भोजपुरी साहित्य

भाई-भाई में जब बँटवारा भइल

नूरैन अंसारी , नई दिल्ली
13.9K Views
20 जून 2026 · 12:07 अपराह्न IST

भाई-भाई में जब बँटवारा भइल,
पाटीदारन के घरे भण्डारा भइल

माई-बाबू के केहू झूठो ना पुछल
एकही गो रोटी कई खाड़ा भइल.

अमीरी में डाह के धइलस बेमारी,
गरीबी में तऽ प्रेम से गुजारा भइल.

देखल ना गइल लोग से ई बढ़न्ती,
घर फुटल, स्वाहा भाईचारा भइल.

उठ गइल आख़िर देवाल अँगना में,
पर- पंचायत जबकि सारा भइल.

नूरैन हेरा गइल ख़ुशी घर से हमरा,
टुवर जइसन आँगन,ओसारा भइल

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