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भोजपुरी साहित्य

शहर के आगे गाँव के कीमत

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28 अक्टूबर 2026 · 12:14 अपराह्न IST
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शहर के आगे गाँव के कीमत,
के बुझी एह प्यार के कीमत।

बर-बोखार से डेराइल लोगवा,
भारी भइल अब बीमार के कीमत।

भावुकता में अब बहल छोड़ऽ,
बुझऽ अपना इनकार के कीमत।

सौ गज के प्लॉट के आगे,
का रह गइल दुआर के कीमत।

भाई ना त का दुश्मन बुझी,
अँगना में उठल दीवार के कीमत।

‘भावुक’ देहिया माटी ह,
कुछुओ होखे सोनार के कीमत।

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