नज़र से नज़र रूबरू हो गईल।
बसेके हिया में आरज़ू हो गईल।
आँखि से आँखि के होते मिलन,
लब हिलले बगैर गुफ़्तगू हो गईल।
एक पल साँस थमल आ फिर से,
धड़कन हिया के शुरू हो गईल।
चाह के ना रुकेला सिहरन बदन के,
नाहीं जाने ई कईसन जादू हो गईल।
एक दूजे में अईसन समा गईलें कि,
मैं से मैं अउर तूँ से तूँ हो गईल।
तह तक ले इहवाँ भींजल प्रेम में,
लोर से ही बदन के वजू हो गईल।
संगम भईल यश उलफ़त के दिली,
पता ना चलल आई लव यू हो गईल।