टूटली खटियवा पे, रोवेले महतरीया।
के देई रोटी हमके,केकर बा परिया।
घर में से निकलेली बड़की पतोहिया।
काहे चिल्लात बाड़ू धीर धर बुढ़िया।
घर के स्वांग अबहिन खइले नहींखे।
इनही के दे दी पहिले भर थरिया।
टूटली खटियवा पे, रोवेले महतरीया।
के देई रोटी हमके,केकर बा परिया।
टूटली खटियवा पे, रोवेले महतरीया।
के देई रोटी हमके,केकर बा परिया।
घर में से निकलेली बड़की पतोहिया।
काहे चिल्लात बाड़ू धीर धर बुढ़िया।
घर के स्वांग अबहिन खइले नहींखे।
इनही के दे दी पहिले भर थरिया।