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भोजपुरी साहित्य
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खुश हों मन से, न उदास रहीं।

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29 अक्टूबर 2026 · 12:51 अपराह्न IST

खुश हों मन से, न उदास रहीं।

खुश हों मन से न उदास रहीं।
खुशहाल रहीं मुसकात रहीं।
कुछ गीत रचीं कुछ गाय चलीं।
खुद भी सुनि लोग सुनाय चलीं।
सबके हिय के बन खास रहीं।
खुश हों मन से न उदास रहीं।

जग में इह जीवन व्यस्त चले।
निज कारज में मद मस्त चले।
हँस के चलि औउ हँसाय चलीं ।
सब में छवि आप बसाय चलीं।
जँह लोग मिले मिल पास रहीं।
खुश हों मन से न उदास रहीं।

भगवान कईल, इहां सब बा।
लख के त कहीं, इ कहां दब बा।
बस याद करीं नित ईश्वर के ।
सब में हिं बसे परमेश्वर के।
उनके कर संगत साथ रहीं।
खुश हों मन से न उदास रहीं।

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