माहौल कुछ अइसन बनावल जा रहल बा
सांच से सांचे के छिपावल जा रहल बा।
चान होला आसमान में सब जानत बा
लेकिन जमीन पर देखावल जा रहल बा।
हर नुमाइंदा विकास के बात करेला
मगर विकास आपन करावल जा रहल बा।

घर में अनाज,तन ढ़के के कपड़ा नइखे
ओहू के बुरबक बनावल जा रहल बा।
जे कबो कवनो लड़ाई लड़लहीं नइखे
झूठिया सेनानी बनावल जा रहल बा।
बात होखे के चाहीं मुद्दा पर कवनो
मुद्दा से ध्यान अब भटकावल जा रहल बा।
सांच के सांच कहलो अब मुनासिब नइखे
सांच के झूठ से भरमावल जा रहल बा।
साथ देबे खातिर साथ में चलत नइखन
घात करे खातिर मित्र बनावल जा रहल बा।
रस्सी जरि गइल तबो अंइठल जात नइखे
नया लिखवैयन के दबावल जा रहल बा।
गजब के खेला चल रहल बाटे इहंवा
कुकुरो-बिलार सेर बनावल जा रहल बा।