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कविता

इज्जत एगो बाबू-माई के

आज फेर इज्जत एगो बाबू-माई के
माटी में लसरात, मिलावत देखनी ह।

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5 नवम्बर 2026 · 11:05 अपराह्न IST

आज फेर इज्जत एगो बाबू-माई के
माटी में लसरात, मिलावत देखनी ह।

इंस्टाग्राम-फेसबुक पर रील बनाके,
बाबू-माई आ भाई पर झुझुआवत देखनी ह।

बढ़-चढ़ के बोलत, भौंह सिकोड़ के,
अपना यार के पुचकारत, दुलारत देखनी ह।

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ना लउकली रील में पुरहर जवान ऊ,
बाकिर बाबू के पगड़ी उछालत देखनी ह।

का जाने बालिग रहली कि ना रहली ऊ,
बोली के टान से फुफकारत देखनी ह।

आपन नाम-पता, बाबू-भाई के नाम लेत,
समाज में कुल खानदान के नाक कटवावत देखनी ह।

लाज-शरम, तमीज आ तहजीब के,
साफा घोर के पीयत, लजात हमहूँ देखनी ह।

वीडियो में चिचियात, थाना-पुलिस के बात करत,
बाबू-भाई से जान के खतरा बतावत देखनी ह।

‘प्यार करिले इनसे आ करेलें ई हमरा से,
जइसे भी राखस, रह लेब’ — ई बतिया कहत,
ना लजात देखनी ह,
ना लजात देखनी ह।

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