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कविता

स्वास्थ्य ही तऽ मनई के शान बा

स्वास्थ्य के बिना अधूरा जहान बा,स्वास्थ्य ही तऽ मनई के शान बा। धन - दौलत तऽ हाथ के मइल बा,जे ना समझे, ऊ बुद्धि से बइल बा। धन के बिना तन के…
तौसीफ़ अहमद , ब्रह्मपुर, बक्सर
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6 नवम्बर 2026 · 09:47 अपराह्न IST

स्वास्थ्य के बिना अधूरा जहान बा,
स्वास्थ्य ही तऽ मनई के शान बा।

धन – दौलत तऽ हाथ के मइल बा,
जे ना समझे, ऊ बुद्धि से बइल बा।

धन के बिना तन के नाही अड़ान बा,
स्वास्थ्य बिना धन के, का बखान बा।

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बाकिर बौराइल तऽ मनई के मन बा,
मानअ चाहे ना, स्वास्थ्य ही धन बा।

धन के पीछे ही तs भागत इंसान बा,
भूला गइल तन में ही बसल प्राण बा।

रुपिया – पइसा जोड़त दिन -रात बा,
सेहत से बाकिर खात उ तs मात बा।

तबो ना समझे , नाही देत धियान बा,
कब उजड़े ई चार दिन के दुकान बा।

धन्वंतरि के तऽ अइसहीं करम बा,
बाकिर मनई में कहाँ ,अब शरम बा।

कुबेर ही तs ओकर दुनिया जहान बा,
पा के समझत खुद अब उ कप्तान बा।

जवन राह चुनs, ई तोहार मरजी बा,
एहर वोहर होत अब बहुते फरजी बा।

किन लs झाड़ू वाड़ू ई तs बिधान बा,
तौसीफ़ जांतिये के लसराइल धान बा।

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