आपस में अझुराइल बोलीं ठीक कहाई का?
तू-तू-मैं-मैं कइला से झगड़ा फरियाई का ?
सोच-समझ के कुछऊ बोले चाले के चाहीं,
मुंँह से निकलल बाति लौट के, वापस आई का?
बड़ बानीं तऽ बड़ भइला के आपन गरिमा बा,
छोटकन से अझुराइब इज्जत बांचे पाई का?
आन की कहला पर आपस में लाठी जे तानी,
चैन के दाना ए जिनगी में कबहूंँ खाई का?
मेल मोहब्बत जे अपना भाई से ना राखल,
चार लोग भी ओकरा पाछे हाथ उठाई का?




