बीतल बात उपाटल जाता
सोझे आँख उलाटल जाता
मत पूछीं रिश्ता के लीला
अपने घर में छाँटल जाता
झूठ बोलीं त पदक मिलीं
साँच कहे पर डाँटल जाता
आपन ऐब छुपा के ईहवा,
दोष दोसरा में साटल जाता
सिद्धांत, उसूल कहे के बा
पतल दरबारी चाटल जाता
कबहूँ जात त कबहूँ धर्म पर
इहाँ लोगन के बाँटल जाता
नूरैन, लड़ा के भाई-भाई के
फसल चुनावी काटल जाता
नूरैन भाई के रचना हमेशा से निमन रहेला। मज़ा आ गइल पढ़ के भाई, शुभकामना।