हँसत-हँसत जब आँखि भरल,
जब साँझ भइल, जब दिन ढरल।
केहु याद आइल, केहु मन पड़ल।
जब पुरवा बयार बहल,
बदरी चारु ओर ढहल।
दिने में जब अन्हार भइल,
मौसम खुशगवार भइल।
जब मन के घवद पर आस फरल,
केहु याद आइल, केहु मन पड़ल।
बेर-बेर जब हिचकी आइल,
बेमतलब जब मन मुरझाइल।
केहु पास में रहि के दूर भइल,
जब दिल बेबस मजबूर भइल।
सझवत बेरा जब दियरी जरल,
केहु याद आइल, केहु मन पड़ल।
बहुत सुंदर रचना।