जिनगी के का-का तमाशा देखावे जरूरत

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

जिनगी के का-का तमाशा देखावे जरूरत,
कबो हँसावे त कबो ई रोवावे जरूरत।

​शेर जंगल के त राजा हवे बाकिर इहाँ,
अब सियारो के गद्दी प बइठावे जरूरत।

​महल के चाहत में रस्ता भुला गइनी हम,
अब त झोपड़िउ में नेह के जगावे जरूरत।

​राह जोहत ही नेह के दियना बुता गइल,
अब फालतू में काहें के हाथ जलावे जरूरत।

​बा शतरंज के बिछौना ई सगरो जहान,
इहाँ अपने के ही मोहरा बनावे जरूरत।

​जब मिले ना उजियार राह में ‘भावुक’ कहीं,
तब त खुद के ही सूरज बनावे जरूरत।

मुकेश भावुक

होम
लाइव
वीडियो ई-पत्रिका एप