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कसक जीवन के…मन कबों थोर ना रहे

सुजीत पाण्डेय बक्सर

सुजीत पाण्डेय 3 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 05:36 IST)

मन कबों थोर ना रहे
जिगर कमजोर ना रहे
16 स के दौड़ मारी रोज,
अइसन कवनो भोर ना रहे!

जिला में चलत रहे नाव,
कवन जवार में शोर ना रहे
कोशिश रहे सवार दी कालहू
हिम्मत के ओर ना रहे….!

दिन बदलल, हालात सुधरल
बाकी सोचनी तवन बात ना रहे
रही जाला कचक के जियरा
जिस्म रहे पर जज्बात ना रहे!

मैदान में सामने टिक जाईत
अइसन केवनो जोड़ ना रहे
लाख कोशिश भईल ‘ सु जीत
एह किस्मत में उ अंजोर ना रहे!

कठिन शब्द अउर अर्थ

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