खोजें (Search)
पुरवइया
भोजपुरी साहित्य

बहुत नाच जिनिगी नचावत रहल

मनोज भावुक
10 अप्रैल 2026 · 04:11 अपराह्न IST

बहुत नाच जिनिगी नचावत रहल
हँसावत, खेलावत, रोआवत रहल

कहाँ खो गइल अब ऊ धुन प्यार के
जे हमरा के पागल बनावत रहल

बुरा वक्त में ऊ बदलिये गइल
जे हमरा के आपन बतावत रहल

बन्हाइल कहाँ ऊ कबो छंद में
जे हमरा के हरदम लुभावत रहल

उहो आज खोजत बा रस्ता, हजूर
जे सभका के रस्ता देखावत रहल

जमीने प बा आदमी के वजूद
तबो मन परिन्दा उड़ावत रहल

कबो आज ले ना रुकल ई कदम
भले मोड़ पर मोड़ आवत रहल

लिखे में बहुत प्राण तड़पल तबो
गजल-गीत ‘भावुक’ सुनावत रहल

होम कवि सम्मेलन वीडियो शब्दकोश अकाउंट