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अब तऽ कुछ तू बोल रे मनवा

आखिर उनसे रिश्ता का बाऽ?अब तऽ कुछ तू बोल रे मनवा! आँख के राहे नींद, नींद मेंबदरी अस छा जालींहवा के जईसन डोल-डोल केधुआँ -…
राम अचल पटेल 9 जुलाई 2026 (पब्लिश्ड: 10:52 IST)

आखिर उनसे रिश्ता का बाऽ?
अब तऽ कुछ तू बोल रे मनवा!

आँख के राहे नींद, नींद में
बदरी अस छा जालीं
हवा के जईसन डोल-डोल के
धुआँ – धुआँ हो जालीं

बदरी धुआँ के रिश्ता वाला
भेद जरा तू खोल रे मनवा

छन में धरती छन में अम्बर
छन में नील गगन में
पलक झपकते पर्वत घाटी
बाग – बगईचा वन में

पर्वत, नदिया, झरना, घाटी
कईसन बा ई झोल रे मनवा

काश! ठहरतीं पल भर खाती
बस दू बोल हो जाईत
कुछ हम आपन कुछ ऊ आपन
कह के चैन भेंटाईत

चैन बिना एह जिनगी के ना
होला कवनो मोल रे मनवा

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