पुरवइया

छोट बात पर खास लोग से मुंह मोरल थोड़े जाला

रिश्ता के मिठास में मनईविख घोरल थोड़े जाला,छोट बात पर खास लोग सेमुंह मोरल थोड़े जाला,जइसे खाके दवाई समय पऽठीक कइल जाला बेमारी के,आपन आँख…
रिशु कुमार गुप्ता 19 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 09:59 IST)

रिश्ता के मिठास में मनई
विख घोरल थोड़े जाला,
छोट बात पर खास लोग से
मुंह मोरल थोड़े जाला,
जइसे खाके दवाई समय पऽ
ठीक कइल जाला बेमारी के,
आपन आँख दुखाला
त फोरल थोड़े जाला।

कम बेसी ला ताना-तानी
सवभाव ह इंसान के,
आपन घर के भेद-मरम
केहू से बाँटल थोड़े जाला,
जस जस ठोकर लागेला
कुछ-कुछ सिखेला इंसान,
बीच में भइल गलती के
पोस्टर साटल थोड़े जाला,
धीरे धीरे मरहम लगाके
सब कइल जाला सामान्य,
जे हाथ में होला घाव त
हाथ काटल थोड़े जाला।

सुख-दुःख बा दूगो पहलू
दुनिया वाला सिक्का में,
हो सकेला गलती-सही
अलग-अलग तरीका में,
छोट बचवा से गलती होला
त ओहके मारल थोड़े जाला,
समझावल-बुझावल जाला
ओहके जारल थोड़े जाला,
हम सब अकेले कऽ लेबऽ
इ खाली अभिमान हऽ,
आपन चिता में अपने से
आगी बारल थोड़े जाला।

आपन कबहु कामे आई
दुआ अउर दवाई में,
प्रेम से सीचत रही सभके
रिश्तन के मँहगाई में,
जवन नदी में पानी होला
ओके भरल थोड़े जाला,
आपन हीरा चमकेला
त जरल थोड़े जाला,
नइखे सभे समझदार
इ दुनिया वाला पाठ में,
सोगहग बूट फूला जाए तऽ
ओहके दरल थोड़े जाला।

रिश्ता बड़ा नाजुक होला,
ई बात मानीं रिशु के,
हियरा में पनपल दरद
जब धीरे-धीरे गहराला,
एक बेर जे दरार पड़ जाव,
कहाँ सहजिए भराला?

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