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मनोज भावुक के नजरिया: बनारस एगो शहर ना, मन के अवस्था ह

सावन के पावन महीना चल रहल बा। चारो तरफ रिमझिम फुहार आ बम-बम भोले के जयकारा गूँज रहल बा। अइसन भक्तिमय माहौल में एगो नया…
द पुरवइया डेस्क 17 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 01:51 IST)

सावन के पावन महीना चल रहल बा। चारो तरफ रिमझिम फुहार आ बम-बम भोले के जयकारा गूँज रहल बा। अइसन भक्तिमय माहौल में एगो नया भोजपुरी गीत इंटरनेट पर खूब गर्दा उड़वले बा। बोल बा— ‘हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs’।

गाना ‘Bhojpuri IT Cell’ के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज भइल बा आ रिलीज होतही पहिलके दिन 5 लाख से जादे लोग एकरा के देख चुकल बा। अब बात खाली व्यूज के नइखे, बात बा एह गीत के भाव, संगीत आ ओकरा पीछे के दर्शन के।

गीत के टीम

एह गीत के पूरा ताना-बाना भोजपुरी के कई गो मँजल कलाकारन से सजल बा। गीतकार बाड़ें भोजपुरी के जाने-माने साहित्यकार आ वरिष्ठ लेखक मनोज भावुक। सुर देलें बाड़ी सुरभि कश्यप आ अर्जुन पांडेय। संगीत भोजपुरी सिनेमा के चर्चित संगीतकार रजनीश मिश्रा के बा। गीत के परिकल्पना आस्था द्विवेदी कइले बाड़ी। वीडियो के डायरेक्शन सुमित तिवारी कइले बाड़ें आ कैमरा सँभालले बाड़ें सुधांशु सिंह। एकर निर्माण वन शॉट फिल्म्स के बैनर तले भइल बा, जेकर निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी बाड़ें।

गीत में अइसन का बा जे सीधे दिल में उतर जाला?

गीत के मुखड़ा सुनब त मन एकदम शांत आ भक्तिभाव से भर जाई: “हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs, दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs…”

बाकिर मामला खाली अतने तक सीमित नइखे। गीत के अंतरा में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट आ भारतीय दर्शन के चार गो स्तंभ— धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष के बहुत सहज भोजपुरी में पिरोवल गइल बा। एतने ना, शहर के मशहूर ‘लंका चौराहा’ के प्रतीक बना के जिनगी के द्वंद्व आ आध्यात्म के रस्ता के समझावे के सुंदर कोसिस भइल बा।

मनोज भावुक के नजरिया: बनारस एगो शहर ना, मन के अवस्था ह

गीतकार मनोज भावुक के कहना बा कि ई खाली कर्मकांडी भजन नइखे, बल्कि बनारस के जीवन-दर्शन के संगीतमय रूप ह। ऊ कहेलन, “बनारस खाली भूगोल के नक्शा पर बसल एगो शहर ना ह, बलुक ई मनुष्य के भीतरी चेतना के ओह अवस्था के नाम ह, जहाँ शिवत्व, करुणा, वैराग्य आ जीवन के उत्सव एके साथे मौजूद रहेला। एह गीत में महादेव से ईहे अरज कइल गइल बा कि हर मन बनारस बन जाव, जहाँ शांति आ आत्मिक आनंद मिले।”

भावुक जी ईहो कहलन कि भोजपुरी के पहचान खाली हलुक मनोरंजन तक ना रहे के चाहीं। भोजपुरी के समृद्ध सांस्कृतिक आ आध्यात्मिक विरासत के दुनिया सोझा राखल आज के समय के बड़ जरूरत बा।

भावुक-मिश्रा के सुपरहिट जुगलबंदी

मनोज भावुक आ संगीतकार रजनीश मिश्रा के जोड़ी भोजपुरी जगत में पहिले से कइयन गो अर्थपूर्ण गीत खातिर जानल जाले। एहसे पहिले ई जोड़ी ‘तोर बउरहवा रे माई’, ‘आपन कहाये वाला के बा’, ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ आ ‘मेरे राम’ जइसन कालजयी गीत दे चुकल बा। अब ‘मनवा के हमरा बनारस बना दs’ से ई जोड़ी एक बेर फेरु शिवभक्तन आ संजीदा संगीत-प्रेमियन के दिल जीत रहल बा।

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