राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

सगरो देहियां फूला देले बाटे।
कांचे निनिया जगा देले बाटे।

हाथ गोड़ केतनो पटकनी हंँ दादा,
जगे जगे सूई चुभा देले बाटे।

भनर-भनर कइले बा काने में आ के,
फेरा में अइसन फंसा देले बाटे।

फेल भइल आल-आउट, क्वायल प्रोटक्शन,
गतर-गतर दँतवा हला देले बाटे।

कइले बा सगरो तबाह मोरा जिनगी
राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे।

संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

लोको पायलट गोरखपुर
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