बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।

​कहाँ बन्हाइल बा सूरज के रोशनी,
धरती, आसमाँ आ चान से पूछनी,
तबो त अंजोरिया के धोखा बा इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

​साथ बा लोग जब मौसम बहार बा,
पतझड़ में सोझा साफे इनकार बा,
सनेहिया छीटाइल बा बोरा से इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

​भीजल गोइठा में सुनुगता अहरा,
पईचा प कटत बा भीतर आ बहरा,
‘भावुक’ के नेह अकोरा में इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।

मुकेश भावुक

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