ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।
कहाँ बन्हाइल बा सूरज के रोशनी,
धरती, आसमाँ आ चान से पूछनी,
तबो त अंजोरिया के धोखा बा इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
साथ बा लोग जब मौसम बहार बा,
पतझड़ में सोझा साफे इनकार बा,
सनेहिया छीटाइल बा बोरा से इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
भीजल गोइठा में सुनुगता अहरा,
पईचा प कटत बा भीतर आ बहरा,
‘भावुक’ के नेह अकोरा में इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।



