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कविता
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हमरो बा भोजपुरी कविता

कजरी सरसी दोहा गाईं ।
मिले केहू त रोज सुनाईं।

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28 अक्टूबर 2026 · 12:59 अपराह्न IST

हमरो बा भोजपुरी कविता।
मसि-कागद से बा कुछ रिश्ता।
दोहा मुक्तक रोज लिखी ले,
सांच बात हम खोज लिखी ले।
विषय बने ला सागर सविता।
हमरो बा भोजपुरी कविता।

कजरी सरसी दोहा गाईं ।
मिले केहू त रोज सुनाईं।
मजा एहि में खूब मिलेला।
मनवा बनि के फूल खिलेला।
लिखीं भूत आ लिखीं भवित
हमरो बा भोजपुरी कविता।

जलन – दर्द बा बहुते जग में
पग-पग संकट बहुते मग में।
सगरी दूख भगावे वाला ।
मन के सुख पहुँचावे वाला।
कुछ समिधा कुछ अइसन हविषा।
हमरो बा भोजपुरी कविता।

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