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भोजपुरी साहित्य

कबो खूब हमके हंसावल गइल

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
9 अप्रैल 2026 · 07:40 पूर्वाह्न IST

कबो खूब हमके हंसावल गइल,
त कबो बेदर्दी से रोवावल गइल।

नेहिया के नाता से जोड़ी के अब,
बीचही डगर पर छोड़ावल गइल।
​
भरोसा हमार त तिनका रहल,
ओही के सहारे सतावल गइल।
​
संभल के त हमहूँ चलत रहनी पर,
पकड़ के कलाई गिरावल गइल।
​
बिनायक इहाँ केहू नइखे आपन,
इहाँ त बस सपना सजावल गइल।

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