कबो खूब हमके हंसावल गइल,
त कबो बेदर्दी से रोवावल गइल।
नेहिया के नाता से जोड़ी के अब,
बीचही डगर पर छोड़ावल गइल।
भरोसा हमार त तिनका रहल,
ओही के सहारे सतावल गइल।
संभल के त हमहूँ चलत रहनी पर,
पकड़ के कलाई गिरावल गइल।
बिनायक इहाँ केहू नइखे आपन,
इहाँ त बस सपना सजावल गइल।
