माटी कवि सम्मेलन

चईत बुझात कहां बा

कुमार अजय सिंह

11 अप्रैल, 2026

चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,
बनिहार से कटनी, कटात कहां बा।

शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,
गांवन में अब केहू जात कहां बा।
ए. सी. किनाइल त देसी भुलाइल,
खुला हवा अब केहू खात कहां बा।
चईत-चईत लेखा, बुझात कहां बा।

कुदारिन से कोड़ार कोड़ात नइखे,
खेत में पानी करहा मोड़ात नइखे।
ट्रैक्टर – ट्रॉली पर बोझा लादाता,
बैलन पर लादना ढोआत कहां बा।
चईत – चईत लेखा, बुझात कहां बा।

हरवाहन के हाथे खेत जोतात नइखे,
टांड़ के चलाके बिया बोआत नइखे।
खटे वाला मजदूरा, मिलत नइखन,
मार मुंअरिन तीसी पिटात कहां बा।
चईत – चईत लेखा, बुझात कहां बा।

हार्वेस्टर कटर से फसल कटात बा,
बड़ भूंसा के टाल गंजात कहां बा।
खरिहनियो अब त लिपातो नइखे,
अनाजन के ढेरी तउलात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

ओखर – मुसर, ढेकी उफर परल,
जांत में सतुआ पिसात कहां बा।
सतुआनो के दिनवा, चटक चटनी,
सतुअवा जवरे जी भेंटात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

चर-चबेनी, मोहरइया मिलत नइखे,
गंउआ में घुंसार झोंकात कहां बा।
गैस से भरल सिलेंडर किनात बा,
गोइंठा ईंधन खातिर पथात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

आपस में बइठ दुआर – दलान पर,
चईता- चईती अब गावात कहां बा।
ठंडा पानी घइला में रखात कहां बा,
सिलवट प मसाला पिसात कहां बा।
चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा।

दूध- दहीया बिकाता पोलिथीन में,
नादा में गोरसवा अवंटात कहां बा।
सिरफल के शर्बत अब दुलम भइल,
बुंटवा के होरहा झोरात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

इनार के कचड़ा उड़हात कहां बा,
ठंढा पानी से करेज जुड़ात कहां बा
बात त बहुत लिखे के अबहियों बा,
अजय लिखले, लिखात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • सिरफल: बेल।
  • बनिहार: मजदूर।
  • चटनी: व्यंजन।
  • ढेर: बहुत।
  • खर: सूखी घास।
  • सिलवट: मसाला पीसे वाला पत्थर।
  • जात: अनाज पीसे वाला पत्थर के चक्की। (प्रयोग: जांत के पीसल आटा बहुत निमन लागेला।)
  • ढेकी: ई धान कूट के चावल निकाले वाला लकड़ी के पारंपरिक यंत्र ह। (प्रयोग: पहिले के समय में हर घरे ढेकी रहे।)

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कुमार अजय सिंह

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