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देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे

देखलीं जे बइठि के दरिया किनारेडूबके देखला प लागल भिन्न, यारे घर के कीमत का हवे, ऊहे बताईजे रहत फुटपाथ पर लँगटे-उघारे ना परे मन…
मनोज भावुक 10 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 04:13 IST)

देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे
डूबके देखला प लागल भिन्न, यारे

घर के कीमत का हवे, ऊहे बताई
जे रहत फुटपाथ पर लँगटे-उघारे

ना परे मन घर कबो बबुआ के भलहीं
रोज बुढ़िया भोर में कउवा उचारे

बस कहे के हम आ ऊ साथ रहीले
साथ का, जब पड़ गइल मन में दरारे

ख्वाब में भी हम कबो सोचले ना होखब
वक्त ले जाई कबो ओहू दुआरे

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