पुरवइया

चईत बुझात कहां बा

चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,बनिहार से कटनी, कटात कहां बा। शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,गांवन में अब केहू जात कहां बा।ए. सी. किनाइल…
कुमार अजय सिंह 11 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 09:36 IST)

चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,
बनिहार से कटनी, कटात कहां बा।

शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,
गांवन में अब केहू जात कहां बा।
ए. सी. किनाइल त देसी भुलाइल,
खुला हवा अब केहू खात कहां बा।
चईत-चईत लेखा, बुझात कहां बा।

कुदारिन से कोड़ार कोड़ात नइखे,
खेत में पानी करहा मोड़ात नइखे।
ट्रैक्टर – ट्रॉली पर बोझा लादाता,
बैलन पर लादना ढोआत कहां बा।
चईत – चईत लेखा, बुझात कहां बा।

हरवाहन के हाथे खेत जोतात नइखे,
टांड़ के चलाके बिया बोआत नइखे।
खटे वाला मजदूरा, मिलत नइखन,
मार मुंअरिन तीसी पिटात कहां बा।
चईत – चईत लेखा, बुझात कहां बा।

हार्वेस्टर कटर से फसल कटात बा,
बड़ भूंसा के टाल गंजात कहां बा।
खरिहनियो अब त लिपातो नइखे,
अनाजन के ढेरी तउलात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

ओखर – मुसर, ढेकी उफर परल,
जांत में सतुआ पिसात कहां बा।
सतुआनो के दिनवा, चटक चटनी,
सतुअवा जवरे जी भेंटात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

चर-चबेनी, मोहरइया मिलत नइखे,
गंउआ में घुंसार झोंकात कहां बा।
गैस से भरल सिलेंडर किनात बा,
गोइंठा ईंधन खातिर पथात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

आपस में बइठ दुआर – दलान पर,
चईता- चईती अब गावात कहां बा।
ठंडा पानी घइला में रखात कहां बा,
सिलवट प मसाला पिसात कहां बा।
चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा।

दूध- दहीया बिकाता पोलिथीन में,
नादा में गोरसवा अवंटात कहां बा।
सिरफल के शर्बत अब दुलम भइल,
बुंटवा के होरहा झोरात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

इनार के कचड़ा उड़हात कहां बा,
ठंढा पानी से करेज जुड़ात कहां बा
बात त बहुत लिखे के अबहियों बा,
अजय लिखले, लिखात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।

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