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दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा

दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा। नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा। जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे। काम सांचो बात हरदम,बा…
गणेश नाथ तिवारी "विनायक" 9 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 07:48 IST)

दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा।
नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा।

जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे।
काम सांचो बात हरदम,बा करावत लोगवा।।

दोसती के दोष नइखे, बदनसीबी ढेर बा।
आग लागल जिंदगी में,बा जरावत लोगवा।।

देत नइखे साथ हरदम,दोसती के नाम पर।
साथ देबे के समय मे,बा सतावत लोगवा।।

प्रेम के अब नाम पर तू, पाठ पूजा छोड़ दs।
राम जइसन नाम हमके,बा रटावत लोगवा।।

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