दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा।
नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा।
जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे।
काम सांचो बात हरदम,बा करावत लोगवा।।
दोसती के दोष नइखे, बदनसीबी ढेर बा।
आग लागल जिंदगी में,बा जरावत लोगवा।।
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कबो खूब हमके हंसावल गइल
जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में
देत नइखे साथ हरदम,दोसती के नाम पर।
साथ देबे के समय मे,बा सतावत लोगवा।।
प्रेम के अब नाम पर तू, पाठ पूजा छोड़ दs।
राम जइसन नाम हमके,बा रटावत लोगवा।।