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भोजपुरी गीत
2

गोरी के भीज जाला कजरा

गाँव में जब-जब बरसे बदरा,गोरी के भीज जाला कजरा।बिजली गरजत बाटे ना,दुअरे बइठ के देली पहरा,बिजली गरजत बाटे ना॥ (1) पुरवइया धीरे-धीरे बहे,मन के बात केहू ना कहे।अँखिया रस्ता ताके रोजे,पिया बिना…
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15 जून 2026 · 08:42 पूर्वाह्न IST

गाँव में जब-जब बरसे बदरा,
गोरी के भीज जाला कजरा।
बिजली गरजत बाटे ना,
दुअरे बइठ के देली पहरा,
बिजली गरजत बाटे ना॥

(1)

पुरवइया धीरे-धीरे बहे,
मन के बात केहू ना कहे।
अँखिया रस्ता ताके रोजे,
पिया बिना कुछ नीक ना लागे।
भीतर उठेला दरद गहिरा,
दुअरे बइठ के देली पहरा,
बिजली गरजत बाटे ना॥

(2)

अमवा के डारी झूमे लागे,
रिमझिम फुहार तन भिगावे।
कजरी के तान उठे अँगनवा,
याद में भींजे सगरो मनवा।
निंदिया छोड़ि के जागे चेहरा,
दुअरे बइठ के देली पहरा,
बिजली गरजत बाटे ना॥

(3)

किंच-काँच पर टपके बुनिया,
गूँजे कजरी मीठ बोलिया।
घिरि-घिरि आवे कारी बदरिया,
भींजे चुनरी, भींजे नजरिया।
नेहिया उमड़-घुमड़ भरल हियरा,
दुअरे बइठ के देली पहरा,
बिजली गरजत बाटे ना॥

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