जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल
रोटी बदे दुलरुआ खूंटा से बा बन्हाइल

गदहो के बाप बोले, दिनवो के रात बोले
सुग्गा बनल ई मनई पिंजड़ा में बा पोसाइल

शूगर बढ़ल रहत बा, बी.पी. बढ़ल रहत बा
ग़जबे के जॉब बाटे किडनी ले बा डेराइल

पेटवे से बा कनेक्शन एह जॉब के, एही से
सहमल बा शेर अउरी गीदड़ बा फनफनाइल

जे सुर में सुर मिलावल, जे मुंह में मुंह सटावल
ओही के बा तरक्की, ओह पर बहार आइल

मीटिंग के बदले मेटिंग, सर्विस के बदले सेटिंग
जेकरा में ई हुनर बा, ऊ हर जगह फुलाइल

अंधेर राज में बा चमचन के पूछ भलहीं
बेरा प यार हरदम टैलेंट कामे आइल

अन्हियार जे मिटावे, सूरज उहे कहाला
ओही से बाटे दुनिया, ऊहे सदा पुजाइल

अइसे त फेसबुक पर बाड़न हजार साथी
संकट में जब खोजाइल, केहू नजर ना आइल

नेटे प देख लिहलस माई के काम-किरिया
बबुआ बा व्यस्त अतना लंदन से आ न पाइल

साथी के घात से बा गतरे गतर घवाहिल
रिश्तन के जालसाजी भावुक के ना बुझाइल

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • माई: माता।
  • शेर: वजन।

मनोज भावुक

कवि-गीतकार

"मनोज भावुक (जन्म 2 जनवरी 1976) भोजपुरी में लिखने वाले एक भारतीय कवि , अभिनेता, टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता और पटकथा लेखक हैं, जो भोजपुरी सिनेमा में सक्रिय हैं । उन्हें फिल्मफेयर और फेमिना भोजपुरी आइकॉन्स द्वारा "साहित्य में उत्कृष्ट योगदान" की श्रेणी में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कई पुरस्कार विजेता पुस्तकें लिखी हैं। वे भोजपुरी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देते हैं"

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